# उसने बस अपनी ज़िंदगी जी थी...
उसने बस
अपनी ज़िंदगी जी थी—
लोगों ने
उसे कहानी बना दिया,
और फिर
अपने हिसाब से
चरित्र भी लिख दिया।
वो हँसी,
तो वजह पूछी गई।
वो बाहर निकली,
तो सवाल किए गए।
उसने अपने फैसले लिए,
तो उसे समझाने वाले
बहुत मिल गए।
मगर किसी ने
ये नहीं पूछा—
उसने यहाँ तक पहुँचने के लिए
कितनी लड़ाइयाँ
अकेले लड़ी हैं?
कितनी रातें
चुपचाप रोकर गुज़ारी हैं?
कितनी बार
टूटी है,
फिर भी अगले दिन
खुद को समेटकर खड़ी हुई है?
अजीब है ना...
औरत की पूरी ज़िंदगी
किसी को दिखाई नहीं देती,
लेकिन उसके बारे में
एक कहानी बनाने में
लोगों को देर नहीं लगती।
शायद इसलिए...
किसी औरत का चरित्र
उसकी ज़िंदगी देखकर नहीं,
अपनी सोच देखकर लिखने वाले लोग
अक्सर उसकी सच्चाई से
बहुत दूर होते हैं।
वो जैसी है,
उसे वैसा ही रहने दो।
हर औरत को
सफ़ाई नहीं चाहिए...
बस थोड़ा सा सम्मान चाहिए।
Written by: Dilse Diaries by Pooja.K 🌸
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