# सच्ची मोहब्बत की सबसे ख़ामोश पहचान...
हर रिश्ता हमेशा साथ चलने के लिए नहीं बनता। कुछ रिश्ते समय के साथ खामोश हो जाते हैं। बातें बंद हो जाती हैं, मुलाकातें खत्म हो जाती हैं, लेकिन दिल में उनके लिए निकली दुआ कभी खत्म नहीं होती।
यही सच्ची मोहब्बत की सबसे बड़ी पहचान है। जहाँ शिकायतें खत्म हो जाती हैं और उनकी जगह सिर्फ़ एक दुआ रह जाती है—वो जहाँ भी हों, खुश रहें।
आज की यह ओरिजिनल कविता उसी एहसास को शब्द देती है—
"कुछ रिश्ते...
ख़त्म नहीं होते।
बस
उनमें बात होना
बंद हो जाता है।
फिर भी
जब भी
दुआ के लिए
हाथ उठते हैं...
एक नाम
बिना बुलाए
लबों तक आ ही जाता है।
तब समझ आता है...
मोहब्बत
साथ रहने का नाम नहीं थी।
मोहब्बत तो शायद...
किसी के बिना भी,
उसकी ख़ुशी माँगते रहने का नाम थी।"
अगर इस कविता ने आपको किसी ऐसे इंसान की याद दिला दी, जिसके लिए आज भी आपके दिल से दुआ निकलती है, तो इसे उन लोगों के साथ ज़रूर साझा करें जो सच्ची मोहब्बत का अर्थ समझते हैं।
❤️ DilSe Diaries
✍️ Pooja.K
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