# रिश्ते खून से नहीं, व्यवहार से अपने लगते हैं पास बैठो तो किसी को खलने लगते हो, चुप रहो तो किसी को बदलने लगते हो। हर बात सोचकर कहो, फिर भी किसी के दिल में चुभने लगते हो। तब समझ आता है— रिश्ते खून से नहीं, व्यवहार से अपने लगते हैं। कुछ रिश्ते नाम के बहुत करीब होते हैं, लेकिन उ…