# सबको समझते-समझते खुद को समझ आया—मुझे भी मेरी ज़रूरत है
सबको समझते-समझते
एक दिन ख़ुद को समझ आया—
मुझे भी मेरी ज़रूरत है।
कितनी अजीब बात है ना,
हम दूसरों की ख़ामोशी तक पढ़ लेते हैं,
उनके चेहरे की उदासी समझ लेते हैं,
उनकी छोटी-सी परेशानी को भी
अपनी चिंता बना लेते हैं।
लेकिन उसी भागदौड़ में
ख़ुद से पूछना भूल जाते हैं—
"मैं कैसी हूँ?"
हमेशा किसी और की ख़ुशी के लिए
ख़ुद को पीछे रखना
प्यार हो सकता है,
लेकिन हर बार ऐसा करना
ख़ुद के साथ इंसाफ़ नहीं।
कभी-कभी
ख़ुद को भी समय चाहिए,
ख़ुद को भी समझे जाने की ज़रूरत होती है,
और ख़ुद को भी चुने जाने का हक़ होता है।
इसलिए अगर आज
तुमने किसी और से पहले
ख़ुद को चुना है,
तो ख़ुद को दोष मत देना।
कभी-कभी
ख़ुद को चुनना स्वार्थ नहीं होता—
वो बस एक थके हुए दिल की
आख़िरी ज़रूरत होती है।
— DilSe Diaries by Pooja.K
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