# रात ने धीरे से पूछा... तुम अब तक जाग क्यों रहे हो?
रात का सन्नाटा कभी-कभी
हमारे भीतर छुपी उन बातों को आवाज़ दे देता है,
जिन्हें दिन की भागदौड़ में हम अनसुना कर देते हैं।
कुछ यादें ऐसी होती हैं
जिन्हें हम भूलने की कोशिश तो करते हैं,
लेकिन दिल उन्हें जाने नहीं देता।
आज की यह ओरिजिनल कविता
उसी ख़ामोश रात और उन अनकही यादों के नाम—
"रात ने धीरे से पूछा...
सब सो गए हैं...
तुम अब तक जाग क्यों रहे हो?
मैंने कहा...
कुछ बातें नींद से बड़ी होती हैं।
कुछ लोग इतने अपने होते हैं...
कि उनकी यादें तकिये पर सो जाती हैं...
और हमारी आँखें
जागती रह जाती हैं।"
शायद कुछ रातें सोने के लिए नहीं होतीं...
बस अपने भीतर के किसी पुराने एहसास के साथ
थोड़ी देर बैठने के लिए होती हैं।
❤️ DilSe Diaries
✍️ Pooja.K
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