# रिश्ते खून से नहीं, व्यवहार से अपने लगते हैं
पास बैठो तो किसी को खलने लगते हो,
चुप रहो तो किसी को बदलने लगते हो।
हर बात सोचकर कहो,
फिर भी किसी के दिल में चुभने लगते हो।
तब समझ आता है—
रिश्ते खून से नहीं,
व्यवहार से अपने लगते हैं।
कुछ रिश्ते नाम के बहुत करीब होते हैं,
लेकिन उनके व्यवहार में
अपनापन कहीं दिखाई नहीं देता।
और कुछ लोग
बिना किसी रिश्ते के भी
दिल के इतने करीब होते हैं
कि उनके साथ बैठकर
मन को घर जैसा सुकून मिलता है।
इसलिए हर रिश्ता निभाना ज़रूरी नहीं,
कुछ रिश्तों से चुपचाप दूर हो जाना भी ज़रूरी है।
क्योंकि जहाँ तुम्हारी मौजूदगी
किसी को बोझ लगे,
वहाँ बार-बार अपना होना साबित करना
अपने ही दिल को दुखाना है।
कभी-कभी
चुपचाप हट जाना ही
सबसे ख़ूबसूरत जवाब होता है।
— DilSe Diaries by Pooja.K 🌸
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