# आज बारिश चुप थी...
बारिश हमेशा सिर्फ़ मौसम नहीं होती।
कभी-कभी कुछ बूँदें बाहर गिरती हैं,
और कुछ भीतर।
कभी किसी पुरानी याद की तरह,
बारिश भी बिना बताए आ जाती है...
और हमें कुछ ऐसे एहसासों के सामने खड़ा कर देती है,
जिन्हें हम समझते थे कि पीछे छोड़ आए हैं।
आज की यह ओरिजिनल सिनेमैटिक कविता उसी एहसास को शब्द देती है—
"आज बारिश चुप थी...
शायद उसे भी किसी की
याद आई होगी।
क्योंकि
कुछ बूँदें ज़मीन पर नहीं गिरतीं...
सीधे दिल पर गिरती हैं।
और फिर
मौसम नहीं बदलता...
इंसान बदल जाता है।"
शायद इसीलिए कुछ बारिशें
भीगाने से ज़्यादा याद दिलाती हैं।
❤️ DilSe Diaries
✍️ Pooja.K
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