# कुछ ज़ख्म भरते नहीं...
ज़िंदगी में एक समय ऐसा भी आता है जब लोग हमें देखकर कहते हैं—"अब तुम ठीक हो।"
शायद उन्हें हमारी मुस्कान दिखाई देती है, लेकिन मुस्कुराने और सच में ठीक होने के बीच का फ़र्क सिर्फ़ वही समझ सकता है जिसने दर्द को चुपचाप जीया हो।
समय हर घाव नहीं भरता। वह हमें इतना मज़बूत ज़रूर बना देता है कि हम उन घावों के साथ भी मुस्कुरा सकें। धीरे-धीरे दर्द हमारी पहचान नहीं रहता, बल्कि हमारी कहानी का एक हिस्सा बन जाता है।
आज की यह ओरिजिनल कविता उसी एहसास को शब्द देती है—
"आज आईने ने मुस्कुराकर कहा...
लगता है
अब तुम ठीक हो।
मैंने भी
हँसकर जवाब दिया...
चेहरा
ठीक हो गया है।
बस
दिल ने
अब दर्द को
अपना नाम देना
छोड़ दिया है।
कुछ ज़ख्म
भरते नहीं...
बस
इंसान
उनके साथ जीना
सीख जाता है।"
अगर इस कविता ने आपके दिल के किसी पुराने ज़ख्म को छुआ हो, तो इसे उन लोगों तक ज़रूर पहुँचाइए जो बाहर से मुस्कुराते हैं, लेकिन भीतर बहुत कुछ सह चुके हैं।
❤️ DilSe Diaries
✍️ Pooja.K
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