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चाय का आख़िरी घूँट… | Heart Touching Hindi Poetry on Memories

# चाय का आख़िरी घूँट… आज चाय का आख़िरी घूँट पीने ही वाला था… कि अचानक याद आया— पहले ये चाय कभी अकेले नहीं पीता था। एक कप मेरे हाथ में होता था, और दूसरा… किसी अपने के हाथ में। चाय के साथ बातें होती थीं। कभी हँसी होती थी, कभी छोटी-सी नोकझोंक, और कभी ऐसी ख़ामोशी जिसमें भी बहुत कु…

कुछ रिश्ते दरवाज़े जैसे होते हैं — दरवाज़ा खुला था, दिल नहीं

कुछ रिश्ते दरवाज़े जैसे होते हैं कुछ रिश्ते दरवाज़े जैसे होते हैं— सामने से अपने लगते हैं, मगर जैसे ही भीतर जाओ, पता चलता है— दरवाज़ा खुला था, दिल नहीं। ज़िंदगी में हम कई रिश्तों को सिर्फ़ इसलिए अपना मान लेते हैं क्योंकि उनके दरवाज़े हमारे लिए खुले होते हैं। बात करने की जगह हो…

औरत को देखने से पहले समझना सीखो — समाज के बनाए चरित्र के फैसलों पर एक कविता

# औरत को देखने से पहले समझना सीखो उसने ज़िंदगी भर अपना घर बनाया, रिश्ते संभाले, खुद को कई बार पीछे रखा और अपनों के लिए अपनी खुशियाँ तक छोड़ दीं। फिर भी लोगों ने उसके चरित्र का फैसला उसकी दीवारों से नहीं, उसकी खिड़कियों से देख लिया। यही समाज की सबसे अजीब विडंबना है। किसी औरत की…