# डायरी वहीं खत्म हुई थी... या हम?
कुछ पुरानी चीज़ें सिर्फ़ चीज़ें नहीं होतीं।
उनमें हमारे बीते हुए दिनों की आवाज़,
कुछ अधूरे वादे
और कुछ ऐसे लोग छुपे होते हैं
जिन्हें हम पीछे छोड़ आए होते हैं।
कभी-कभी अलमारी साफ़ करते हुए
हमें कोई पुरानी डायरी मिल जाती है...
और उसके साथ
एक ऐसा पन्ना भी खुल जाता है
जिसे हमने सालों पहले बंद कर दिया था।
आज की यह ओरिजिनल कविता
उसी अधूरी कहानी के नाम—
"आज
अलमारी साफ़ करते हुए...
एक पुरानी डायरी मिल गई।
धूल
मैंने उसके कवर से हटाई...
और
उसने
मेरे दिल से
एक आख़िरी पन्ना खोल दिया।
वहाँ
कोई कविता नहीं थी।
बस
एक अधूरी-सी तारीख़ थी...
और
उसके नीचे लिखा था—
'बाकी बातें...
अगली मुलाक़ात में।'
पता नहीं
डायरी वहीं खत्म हुई थी...
या
हम।
मैंने
धीरे से
वो पन्ना बंद किया...
क्योंकि
कुछ कहानियाँ
पूरी नहीं होतीं...
फिर भी
ज़िंदगी भर याद रहती हैं।"
शायद हर कहानी का आख़िरी पन्ना
कागज़ पर नहीं लिखा जाता।
कुछ कहानियाँ
बस वहीं रुक जाती हैं...
और फिर
पूरी ज़िंदगी
याद बनकर आगे लिखी जाती हैं।
❤️ DilSe Diaries
✍️ Pooja.K
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