# सबको समझते-समझते खुद को समझ आया—मुझे भी मेरी ज़रूरत है सबको समझते-समझते एक दिन ख़ुद को समझ आया— मुझे भी मेरी ज़रूरत है। कितनी अजीब बात है ना, हम दूसरों की ख़ामोशी तक पढ़ लेते हैं, उनके चेहरे की उदासी समझ लेते हैं, उनकी छोटी-सी परेशानी को भी अपनी चिंता बना लेते हैं। लेकिन उसी…