एक साड़ी… औरत की ताक़त जिसे दुनिया ने सिर्फ़ एक साड़ी समझा, मुसीबत की उस घड़ी में वही किसी की ज़िंदगी का सहारा बनी। जिस हाथ में चूड़ियाँ खनकती हैं, वही हाथ ज़रूरत पड़े तो किसी को किनारे तक पहुँचा सकता है। औरत को कमज़ोर समझने वालों, इतना याद रखना— वो सिर्फ़ घर सँभालना नहीं जानत…