# ये चेहरा सिर्फ़ चेहरा नहीं… कई ख़ामोश कहानियाँ रखता है
कुछ चेहरे सिर्फ़ चेहरे नहीं होते…
उनके पीछे
कई ख़ामोश कहानियाँ होती हैं।
हँसती हूँ तो लोग समझते हैं,
शायद ज़िंदगी आसान है।
मगर कौन समझे—
कुछ मुस्कानें भी
बहुत कुछ छुपाती हैं।
कभी हम मुस्कुराकर
अपना दर्द छुपा लेते हैं,
कभी चुप रहकर
अपने भीतर की लड़ाई लड़ते हैं।
आँखों में जो सुकून दिखाई देता है,
वो यूँ ही नहीं आया…
कई रातें ख़ुद को समझाते हुए,
कई रिश्ते चुपचाप निभाते हुए,
और कई बार ख़ुद को ही
समेटते हुए गुज़री हैं।
कुछ लोगों ने हमें
हमारी ख़ामोशी से समझा,
और कुछ ऐसे भी थे
जिन्होंने हमारी मुस्कान को ही
हमारी पूरी कहानी समझ लिया।
लेकिन समय के साथ
एक बात समझ आ गई—
हर किसी को
अपनी कहानी समझाना ज़रूरी नहीं।
हर सवाल का जवाब देना ज़रूरी नहीं।
और हर रिश्ते को
आख़िर तक निभाना भी ज़रूरी नहीं।
अब किसी से शिकायत नहीं,
न किसी से कोई सवाल है।
बस इतना सीखा है—
हर किसी के लिए अच्छा बनने से पहले,
ख़ुद के लिए अच्छा होना ज़रूरी है।
क्योंकि हम अक्सर
दूसरों की ख़ुशी बचाते-बचाते
अपना सुकून खो देते हैं।
और फिर एक दिन
आईने में ख़ुद को देखकर
महसूस होता है—
जिस इंसान को
सबसे ज़्यादा समझने की ज़रूरत थी,
वो तो हम ख़ुद थे।
इसलिए अब
ख़ुद से भागना नहीं है।
अपनी कमियों को स्वीकार करना है,
अपने दर्द को समझना है,
अपने दिल को थोड़ा आराम देना है।
क्योंकि ज़िंदगी हमेशा
दूसरों के लिए जीने का नाम नहीं।
कभी-कभी
अपने लिए मुस्कुराना भी ज़रूरी है।
और शायद…
आज जो मुस्कान चेहरे पर है,
वो किसी के आने की ख़ुशी नहीं,
बल्कि
ख़ुद को खोकर
फिर से ख़ुद को पा लेने का
सुकून है। ❤️
कभी-कभी
ज़िंदगी की सबसे खूबसूरत जीत
किसी और को पाने में नहीं होती…
बल्कि
अपने ही बिखरे हुए हिस्सों को
फिर से समेट लेने में होती है।
— Dilse Diaries ✍️ Pooja.K
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