# औरत को देखने से पहले समझना सीखो
उसने ज़िंदगी भर अपना घर बनाया,
रिश्ते संभाले,
खुद को कई बार पीछे रखा
और अपनों के लिए अपनी खुशियाँ तक छोड़ दीं।
फिर भी लोगों ने उसके चरित्र का फैसला
उसकी दीवारों से नहीं,
उसकी खिड़कियों से देख लिया।
यही समाज की सबसे अजीब विडंबना है।
किसी औरत की पूरी कहानी जाने बिना
उसके कपड़ों से,
उसकी आवाज़ से,
उसकी दोस्तियों से,
उसकी चुप्पी से
या उसके किसी एक फैसले से
उसके चरित्र का प्रमाणपत्र बाँट दिया जाता है।
लेकिन कोई यह नहीं पूछता—
उसने किन परिस्थितियों में वह फैसला लिया था?
उसने कितनी रातें जागकर गुज़ारी थीं?
कितनी बातें चुपचाप सह ली थीं?
कितनी बार खुद को समझाकर
फिर से मुस्कुराई थी?
एक औरत को देखकर
उसकी कहानी मत लिखिए।
क्योंकि जो दिखाई देता है,
वह हमेशा पूरी सच्चाई नहीं होता।
कभी उसकी खामोशी को समझिए,
कभी उसकी मजबूरी को,
कभी उसकी लड़ाई को।
क्योंकि चरित्र देखने की चीज़ नहीं,
समझने की चीज़ है।
और शायद...
लोग औरत को देखने से पहले
समझना सीख लें,
तो बहुत-सी औरतों को
हर दिन अपने होने का सबूत देना बंद करना पड़े।
— Dilse Diaries by Pooja.K
Comments
Post a Comment