About Us

Poetry, Short story writing & some thoughts on societies. If you have any query regrading Site, Advertisement and any other issue, please feel free to contact at blogquery06@gmail.com

Privacy Policy

https://docs.google.com/document/d/e/2PACX-1vTXcsu9W2IwiV18gzoMUdNhOdT1UwzE7JOEJjq_9b-rYIZ02m-Tqs9h6yRl1S1IV-ycO_K_iejnr9AN/pub

My Instagram

https://www.instagram.com/dysphoria_writer/

Contact Form

Name

Email *

Message *

Skip to main content
Showing posts from September, 2026

कुछ दिन गुज़र जाते हैं, कुछ दिन ज़िंदगी बन जाते हैं | Heart Touching Hindi Poetry

# कुछ दिन गुज़र जाते हैं, कुछ दिन ज़िंदगी बन जाते हैं कैलेंडर हँस पड़ा… आज कैलेंडर हँस पड़ा, तुम हर दिन बदलते हो… फिर भी कुछ तारीख़ों पर रुक जाते हो। मैंने कहा— कुछ दिन गुज़र जाते हैं, लेकिन कुछ दिन ज़िंदगी बन जाते हैं। कैलेंडर के पन्ने बदलते रहते हैं। आज की तारीख़ कल पुरानी ह…

कुछ लोग रास्तों में नहीं मिलते… दुआओं में रहने लगते हैं | Heart Touching Hindi Poetry

# कुछ लोग रास्तों में नहीं मिलते… दुआओं में रहने लगते हैं हवा ने आज छूकर पूछा— किसे ढूँढ रहे हो? मैंने कहा— जिसे अब कहीं नहीं मिलना। हवा कुछ पल ख़ामोश रही… फिर धीरे से मुस्कुराकर बोली— कुछ लोग रास्तों में नहीं मिलते, वो दुआओं में रहने लगते हैं। मैंने पूछा— लेकिन जब उनकी बहुत य…

Dear Self… खुद को भी चुनना सीखो | Heart Touching Hindi Poetry on Self Care

# Dear Self… खुद को भी चुनना सीखो Dear Self… ❤️ आज किसी को खुश करने की कोशिश मत करना। पहले खुद से पूछना— तुम कैसी हो? क्योंकि कभी-कभी हम दूसरों की ख़ुशी का इतना ख़याल रखने लगते हैं कि अपने ही दिल की आवाज़ सुनना भूल जाते हैं। किसी के लिए समय निकालना, किसी की परेशानी समझना, किसी…

कुछ लोग वापस नहीं आते, उनकी यादें लौट आती हैं — मिट्टी की खुशबू पर एक भावुक कविता

# कुछ लोग वापस नहीं आते, उनकी यादें लौट आती हैं आज बारिश नहीं हुई थी… फिर भी मिट्टी की हल्की-सी खुशबू आई और मैं अचानक रुक गया। पता नहीं क्यों, उस खुशबू में कुछ जाना-पहचाना-सा था। कुछ खुशबुएँ शायद मौसम की नहीं होतीं, वे किसी पुराने समय की होती हैं। एक पल के लिए लगा— जैसे ज़िंदग…

कुछ रिश्ते दरवाज़े जैसे होते हैं — दरवाज़ा खुला था, दिल नहीं

कुछ रिश्ते दरवाज़े जैसे होते हैं कुछ रिश्ते दरवाज़े जैसे होते हैं— सामने से अपने लगते हैं, मगर जैसे ही भीतर जाओ, पता चलता है— दरवाज़ा खुला था, दिल नहीं। ज़िंदगी में हम कई रिश्तों को सिर्फ़ इसलिए अपना मान लेते हैं क्योंकि उनके दरवाज़े हमारे लिए खुले होते हैं। बात करने की जगह हो…

इस बार राखी नहीं बाँध पाऊँगी: दूर बैठे भाई के नाम एक बहन की भावुक कविता

# इस बार राखी नहीं बाँध पाऊँगी… रक्षाबंधन सिर्फ़ एक त्योहार नहीं है। यह उन यादों का दिन है, जब भाई की कलाई पर बँधा एक छोटा-सा धागा बहन के पूरे प्यार को अपने भीतर समेट लेता है। लेकिन हर साल ऐसा नहीं होता कि भाई-बहन एक-दूसरे के पास हों। कभी पढ़ाई दूरी बना देती है, कभी नौकरी, कभी…