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Showing posts with the label Hindi Shayari

समर्पण का असली मतलब क्या है? रिश्तों में प्रेम और समझ

समर्पण समर्पण का मतलब सिर्फ़ किसी के आगे झुक जाना नहीं होता… कभी-कभी समर्पण का अर्थ होता है— अपने “मैं” को थोड़ा पीछे रखकर किसी रिश्ते को बचा लेना। जहाँ हर बात पर जीतने की ज़िद नहीं होती, वहाँ प्रेम धीरे-धीरे गहरा होने लगता है। समर्पण वो नहीं कि आप अपनी पहचान खो दें, अपनी ख़ुश…

पापा को समझना हो तो उनकी ख़ामोश मेहनत देखना

❤️ पापा पापा को समझना हो तो उनकी बातों से ज़्यादा उनकी ख़ामोश मेहनत देखना… माँ की तरह वो हर दर्द पर प्यार नहीं जताते, कई बार तो दर्द पूछने पर भी बस इतना कहते हैं— “कुछ नहीं हुआ।” बचपन में लगता था, पापा बस डाँटते हैं… बड़े होकर समझ आया— उनकी हर डाँट के पीछे एक डर छुपा था, कि क…

प्रेम — सिर्फ़ साथ रहने का नाम नहीं

❤️ प्रेम — सिर्फ़ साथ रहने का नाम नहीं प्रेम हमेशा साथ बैठकर बातें करने में नहीं होता… कभी-कभी प्रेम वो होता है, जब दो लोग दूर रहकर भी एक-दूसरे की ख़ामोशी समझ लेते हैं। प्रेम रोज़ “I love you” कहने में नहीं, बल्कि बिना कहे एक-दूसरे का ख़याल रखने में होता है। आजकल रिश्ते जल्दी …

चाय का आख़िरी घूँट… | Heart Touching Hindi Poetry on Memories

# चाय का आख़िरी घूँट… आज चाय का आख़िरी घूँट पीने ही वाला था… कि अचानक याद आया— पहले ये चाय कभी अकेले नहीं पीता था। एक कप मेरे हाथ में होता था, और दूसरा… किसी अपने के हाथ में। चाय के साथ बातें होती थीं। कभी हँसी होती थी, कभी छोटी-सी नोकझोंक, और कभी ऐसी ख़ामोशी जिसमें भी बहुत कु…

कुछ लोग वापस नहीं आते, उनकी यादें लौट आती हैं — मिट्टी की खुशबू पर एक भावुक कविता

# कुछ लोग वापस नहीं आते, उनकी यादें लौट आती हैं आज बारिश नहीं हुई थी… फिर भी मिट्टी की हल्की-सी खुशबू आई और मैं अचानक रुक गया। पता नहीं क्यों, उस खुशबू में कुछ जाना-पहचाना-सा था। कुछ खुशबुएँ शायद मौसम की नहीं होतीं, वे किसी पुराने समय की होती हैं। एक पल के लिए लगा— जैसे ज़िंदग…

कुछ रिश्ते दरवाज़े जैसे होते हैं — दरवाज़ा खुला था, दिल नहीं

कुछ रिश्ते दरवाज़े जैसे होते हैं कुछ रिश्ते दरवाज़े जैसे होते हैं— सामने से अपने लगते हैं, मगर जैसे ही भीतर जाओ, पता चलता है— दरवाज़ा खुला था, दिल नहीं। ज़िंदगी में हम कई रिश्तों को सिर्फ़ इसलिए अपना मान लेते हैं क्योंकि उनके दरवाज़े हमारे लिए खुले होते हैं। बात करने की जगह हो…

औरत को देखने से पहले समझना सीखो — समाज के बनाए चरित्र के फैसलों पर एक कविता

# औरत को देखने से पहले समझना सीखो उसने ज़िंदगी भर अपना घर बनाया, रिश्ते संभाले, खुद को कई बार पीछे रखा और अपनों के लिए अपनी खुशियाँ तक छोड़ दीं। फिर भी लोगों ने उसके चरित्र का फैसला उसकी दीवारों से नहीं, उसकी खिड़कियों से देख लिया। यही समाज की सबसे अजीब विडंबना है। किसी औरत की…

आज भी फोन की गैलरी में उसका नाम है | दर्द भरी हिंदी शायरी

कुछ नाम कभी जिंदगी से नहीं जाते। यह ओरिजिनल हिंदी शायरी अधूरे प्यार, यादों और खामोश एहसासों को दिल से बयां करती है।