एक साड़ी… औरत की ताक़त
जिसे दुनिया ने
सिर्फ़ एक साड़ी समझा,
मुसीबत की उस घड़ी में
वही किसी की ज़िंदगी का सहारा बनी।
जिस हाथ में
चूड़ियाँ खनकती हैं,
वही हाथ ज़रूरत पड़े तो
किसी को किनारे तक पहुँचा सकता है।
औरत को कमज़ोर समझने वालों,
इतना याद रखना—
वो सिर्फ़ घर सँभालना नहीं जानती,
वक़्त पड़े तो
ज़िंदगी भी सँभाल सकती है।
उस दिन एक साड़ी ने
सिर्फ़ रास्ता नहीं बनाया…
उसने समाज को
एक बात फिर समझा दी—
औरत का सम्मान
उसकी ताक़त का सम्मान है। ❤️
Dilse Diaries ✍🏻 Pooja.K
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