गणपति बप्पा को घर लाना
सिर्फ़ एक त्योहार नहीं…
एक संस्कार है। ❤️
हम उन्हें फूल चढ़ाते हैं,
भोग लगाते हैं,
पूरे प्रेम से पूजते हैं…
तो फिर विदाई के नाम पर
उनकी मूर्ति को
नालों और गंदे पानी में क्यों छोड़ दें?
विसर्जन परंपरा है,
अपमान नहीं।
ऐसी जगह विसर्जन करें
जहाँ प्रकृति भी सुरक्षित रहे,
या पर्यावरण-अनुकूल मूर्ति अपनाएँ।
बप्पा सिर्फ़ दस दिनों के मेहमान नहीं हैं।
उनकी सबसे सुंदर पूजा तब है,
जब उनके जाने के बाद भी
हम अपने भीतर का अहंकार थोड़ा विसर्जित करें,
किसी ज़रूरतमंद की मदद करें,
प्रकृति का सम्मान करें
और अच्छे कर्म करते रहें।
मूर्ति मिट्टी में लौट सकती है,
लेकिन बप्पा की सीख
हमारे कर्मों में ज़िंदा रहनी चाहिए। ❤️
गणपति बप्पा मोरया! 🙏
अगले बरस नहीं…
हर दिन हमारे कर्मों में
आना। 🌺
DilSe Diaries ✍🏻 Pooja.K
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