❤️ प्रेम — सिर्फ़ साथ रहने का नाम नहीं
प्रेम हमेशा साथ बैठकर बातें करने में नहीं होता…
कभी-कभी प्रेम वो होता है,
जब दो लोग दूर रहकर भी
एक-दूसरे की ख़ामोशी समझ लेते हैं।
प्रेम रोज़ “I love you” कहने में नहीं,
बल्कि बिना कहे
एक-दूसरे का ख़याल रखने में होता है।
आजकल रिश्ते जल्दी बनते हैं
और उससे भी जल्दी टूट जाते हैं…
क्योंकि हम प्रेम में
इंसान कम और
उससे मिलने वाली उम्मीदें ज़्यादा देखने लगे हैं।
हमें ऐसा साथी चाहिए
जो हमारी हर बात माने,
हर समय समझे,
कभी बदले नहीं…
लेकिन शायद सच्चा प्रेम
किसी को अपनी पसंद के मुताबिक बदलना नहीं,
बल्कि उसकी कमियों के साथ
उसे स्वीकार करना है।
क्योंकि प्रेम वो नहीं
जहाँ सब कुछ हमारे हिसाब से हो…
प्रेम तो वो है,
जहाँ बहुत कुछ हमारे हिसाब से न होने के बावजूद
हम उस इंसान का हाथ छोड़ना नहीं चाहते। ❤️
रिश्तों में हर दिन सब कुछ परफ़ेक्ट नहीं होता।
कभी मतभेद होते हैं,
कभी ख़ामोशी होती है,
कभी एक-दूसरे को समझने में समय लगता है।
लेकिन अगर इन सबके बीच भी
दिल उस इंसान को छोड़ना नहीं चाहता,
तो शायद वहाँ प्रेम अभी ज़िंदा है।
सच्चा प्रेम किसी को बदलकर
अपने जैसा बनाने की कोशिश नहीं करता।
वो सामने वाले को उसकी पूरी सच्चाई के साथ देखता है—
उसकी अच्छाइयाँ भी,
उसकी कमियाँ भी,
उसकी ख़ामोशियाँ भी।
और फिर भी कहता है—
“मैं तुम्हारे साथ हूँ।”
शायद इसी वजह से
सच्चा प्रेम आज भी मौजूद है,
बस वो दिखावे से थोड़ा दूर है। ❤️
Dilse Diaries ✍🏻 Pooja.K
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