हरतालिका तीज सिर्फ़ एक व्रत नहीं है।
इसके पीछे एक ऐसी भावना भी है, जिसे शब्दों में पूरी तरह बाँध पाना शायद आसान नहीं। एक स्त्री जब अपने जीवनसाथी के लिए प्रार्थना करती है, तो उसकी इच्छा हमेशा सुख-सुविधाओं या बड़े उपहारों तक सीमित नहीं होती।
कभी उसकी सबसे बड़ी इच्छा बस इतनी होती है कि जिस हाथ को थामकर उसने जीवन की शुरुआत की है, वही हाथ उम्र के आख़िरी पड़ाव तक उसके साथ रहे। ❤️
न सोने के गहनों की चाह,
न बड़ी-बड़ी खुशियों की फ़रमाइश…
बस इतना-सा मन है कि जिस रिश्ते को प्रेम से अपनाया है, उसमें विश्वास कभी कम न हो।
तीज का व्रत केवल भूखे रहने की रस्म नहीं,
कभी-कभी यह उस प्रेम का उत्सव भी है जिसमें दो लोग एक-दूसरे की खुशी में अपनी खुशी ढूँढ़ लेते हैं।
वो सजती है,
मेहंदी रचाती है,
पूजा करती है…
और मन ही मन यही कहती है—
“हे शिव-पार्वती,
हमारे रिश्ते में उतना ही प्रेम रखना,
जितना आज है…
और उतना ही विश्वास,
जितना हर मुश्किल के बाद भी
हमें एक-दूसरे के पास ले आए।”
क्योंकि सच्चा सुहाग सिर्फ़ माँग में सजे सिंदूर का नाम नहीं।
वो उस इंसान का साथ है,
जो ज़िंदगी की हर ऋतु में
आपका हाथ छोड़ना नहीं जानता। ❤️
हरतालिका तीज हमें यही याद दिलाती है कि रिश्तों की असली खूबसूरती दिखावे में नहीं, बल्कि उस भरोसे में होती है जो समय के साथ और गहरा होता जाता है।
हरतालिका तीज की हार्दिक शुभकामनाएँ। 🌿❤️
Dilse Diaries ✍🏻 Pooja.K
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