# कुछ दिन गुज़र जाते हैं, कुछ दिन ज़िंदगी बन जाते हैं
कैलेंडर हँस पड़ा…
आज कैलेंडर हँस पड़ा,
तुम हर दिन बदलते हो…
फिर भी कुछ तारीख़ों पर रुक जाते हो।
मैंने कहा—
कुछ दिन गुज़र जाते हैं,
लेकिन कुछ दिन ज़िंदगी बन जाते हैं।
कैलेंडर के पन्ने
बदलते रहते हैं।
आज की तारीख़
कल पुरानी हो जाती है।
एक महीना खत्म होता है,
दूसरा शुरू हो जाता है।
साल भी चुपचाप
बीतते चले जाते हैं।
लेकिन इन बदलती तारीख़ों के बीच
कुछ दिन ऐसे होते हैं
जिन्हें समय भी
हमसे छीन नहीं पाता।
क्योंकि वो सिर्फ़ दिन नहीं होते…
उनमें किसी की हँसी होती है,
किसी की आवाज़ होती है,
किसी का साथ होता है,
या कोई ऐसा पल होता है
जिसे हम दोबारा जीना चाहते हैं।
वो दिन कैलेंडर से
भले ही उतर जाएँ,
लेकिन दिल से नहीं उतरते।
कभी अचानक
वही तारीख़ सामने आ जाती है
और लगता है—
जैसे समय ने
एक पल के लिए पीछे मुड़कर
वही पुराना दिन दिखा दिया हो।
हम मुस्कुराते हैं,
फिर चुप हो जाते हैं।
क्योंकि कुछ यादें
खुशी भी देती हैं
और आँखें भी नम कर जाती हैं।
ज़िंदगी आगे बढ़ती रहती है…
लोग बदल जाते हैं,
रास्ते बदल जाते हैं,
शहर बदल जाते हैं,
और हम भी बदल जाते हैं।
मगर कुछ तारीख़ें…
वो वहीं रहती हैं।
हमारे भीतर।
हमारी यादों में।
हमारी ख़ामोशी में।
शायद इसीलिए—
कुछ दिन गुज़र जाते हैं,
लेकिन कुछ दिन
ज़िंदगी बन जाते हैं।
और ज़िंदगी भले ही
आगे बढ़ जाए…
कुछ तारीख़ें
हमेशा याद रह जाती हैं। ❤️
— Dilse Diaries ✍️ Pooja.K
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