# खामोशी ने जवाब दिया… जब शब्द दिल तक नहीं पहुँचते
खामोशी ने जवाब दिया… ❤️
मैंने खामोशी से पूछा—
तुम इतनी भारी क्यों होती हो?
वो कुछ पल चुप रही…
फिर धीरे से बोली—
जब शब्द दिल तक नहीं पहुँच पाते,
तो मैं उनकी जगह रहने आ जाती हूँ।
मैंने फिर पूछा—
लेकिन लोग तुम्हें
कमज़ोरी क्यों समझते हैं?
खामोशी मुस्कुराई और बोली—
क्योंकि लोग सिर्फ़ आवाज़ सुनते हैं,
दिल की थकान नहीं।
उन्हें क्या पता
कि कभी-कभी इंसान
बोलना इसलिए बंद नहीं करता
कि उसके पास कहने को कुछ नहीं होता…
वो इसलिए चुप हो जाता है
क्योंकि उसने बहुत कुछ कहकर देख लिया होता है।
समझाने की कोशिश की होती है।
अपना दर्द बताया होता है।
अपनी बात रखी होती है।
लेकिन जब सामने वाला
सुनना ही न चाहे,
तो शब्द भी थक जाते हैं।
और फिर…
खामोशी जन्म लेती है।
हर ख़ामोशी कमज़ोरी नहीं होती।
कई बार वो
बहुत कुछ सह लेने के बाद
खुद को संभालने का तरीका होती है।
कई बार इंसान
इसलिए नहीं रोता
क्योंकि उसका दर्द कम है…
बल्कि इसलिए
क्योंकि वह अपने आँसुओं को भी
तमाशा नहीं बनाना चाहता।
कुछ दर्द ऐसे होते हैं
जिन्हें दुनिया के सामने
कहा नहीं जाता।
बस दिल में रखा जाता है।
और कुछ ख़ामोशियाँ…
टूटे हुए दिल की
आख़िरी इज़्ज़त होती हैं।
इसलिए अगर कोई
आजकल बहुत चुप है…
तो उसकी ख़ामोशी को
उसकी कमज़ोरी मत समझना।
हो सकता है,
उसने अपने भीतर
एक पूरी दुनिया को
बहुत मुश्किल से संभाल रखा हो।
क्योंकि हर दर्द
आवाज़ नहीं करता…
कुछ दर्द
ख़ामोशी बनकर
उम्र भर साथ चलते हैं। ❤️
— Dilse Diaries ✍️ Pooja.K
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