हर रिश्ता एक दिन में नहीं टूटता। अक्सर छोटी-छोटी अनदेखियाँ, बढ़ती हुई दूरियाँ और ख़ामोशी धीरे-धीरे उस रिश्ते की नींव को कमज़ोर कर देती हैं। यही एहसास इस भावनात्मक विचार में छिपा है।
रिश्ते ख़ामोशी से बिखरने लगते हैं
रिश्तों को बचाने के लिए बड़े वादों की नहीं, छोटी-छोटी परवाह की ज़रूरत होती है। जब अहमियत कम होने लगती है, तो दूरी अपने आप बढ़ जाती है।
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✍️ Pooja.K
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