हर रिश्ता शब्दों से नहीं चलता।
कई बार जो बातें हम कह नहीं पाते, वही हमारे रिश्तों को सबसे ज़्यादा बचा लेती हैं।
हर सच बोल देना हमेशा समझदारी नहीं होती।
कभी-कभी ख़ामोशी, बहुत बड़े तूफ़ानों को आने से रोक देती है।
यह छोटी-सी ओरिजिनल पोस्ट उन्हीं अनकहे एहसासों के नाम...
कभी-कभी हम सोचते हैं कि हर बात कह देना सही होता है।
लेकिन सच यह है कि हर सच बोलना हर समय ज़रूरी नहीं होता।
कुछ शब्द रिश्ते तोड़ देते हैं, और कुछ ख़ामोशियाँ रिश्ते बचा लेती हैं।
जो इंसान हर समय अपनी बात साबित करने में लगा रहता है, वह अक्सर अपने सबसे क़रीबी लोगों को खो देता है।
कभी-कभी चुप रह जाना हार नहीं, बल्कि रिश्ते को जीतने का तरीका होता है।
क्योंकि हर बहस जीतकर भी इंसान सुकून हार सकता है।
और कई बार एक ख़ामोशी, पूरी ज़िंदगी की मोहब्बत बचा लेती है।
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