यह अविवाहित लड़को ने आज तक वृद्धा आश्रम के दर्शन क्यों ना किये
विवाहित ने ही क्यों किये दर्शन ...
क्या वो अपने जीवन का पहला प्यार उनके माँ बाप को भूल गए
या उन्हें उनके दूसरे प्यार ने पहला प्यार भुला दिया ...
अगर वो अपना पहला प्यार भूल सकते है तो दूसरा क्यों नहीं ???
बस गुंजाईश हो सकती है समझौते की जो वो अपने परिष्तिथि से करते है ।
वरना हर बेटे को उनके माँ बाप अच्छे ही लगते है ...
सवाल है मेरा उन माँ और उनकी बेटी से !!!
जो अपने घर के दीप को रोशन करना भूल जाती है
या अपना आश्तित्व ...
या उन्हें वो उनका भविष्य बताना भूल जाती है ,
या वो भूल जाती है दिखाना उन्हें कर्मा का वो आईना जो उनपे एक दौर पे आएगा ...
आज उसने एक परिवार बिखेरा है , कल दिन लौटके उसका भी आएगा । । ।
समझके परिवार चलाना सही नहीं
मिलके चलाना सही है यार ...
एक माँ बाप के साथ परिवार पूरा कर जाना और पुरानी परम्परा को आगे बढ़ाना हमारा काम है...
याद रखो हम देवी है इस जहाँ की
प्यार देना और माफ़ करना यही काम है ...
याद रखना उस दर्द को जो वो हमें बतातें नहीं
हमारे प्यार के आगे भी वो अपने माँ बाप को भूल पाते नहीं ...
सीता बनो उस घर की जो अपना मूल -धन दे जाते है
एक माँ से पूछो वो अपनी आँख का तारा कैसे तुम संग बात जाते है ...
मुझे आज भी यही सवाल बहुत सताते है
एक लड़के अपने माँ बाप को कैसे भूल जाते है ।।।
पीहू ।
दिल की बात
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